राजकुमार
हरिद्वार जनपद में ड्रग इंस्पेक्टर अनीता भारती पर लगे भ्रष्टाचार और अवैध वसूली के आरोपों के बीच अब एक नया विवाद भी जुड़ गया है। आरोपों के साथ-साथ उनकी लंबे समय से एक ही स्थान पर तैनाती को लेकर स्थानांतरण नियमावली के उल्लंघन का मुद्दा भी जोर पकड़ने लगा है।
प्रेस क्लब सभागार में आयोजित प्रेस वार्ता में प्राइड फार्मा कंपनी के प्रतिनिधि रमेश मैठाणी और युवा कांग्रेस के जिलाध्यक्ष कैश खुराना ने बताया कि दवा निर्माण लाइसेंस के लिए किए गए आवेदन के बाद उनसे कथित रूप से अलग-अलग माध्यमों से पैसे की मांग की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि व्हाट्सएप के जरिए रकम मांगी गई और किस्तों में भुगतान कराया गया। कंपनी का दावा है कि पूरी प्रक्रिया के दौरान कई बार दबाव बनाकर धन उगाही की गई।
इस पूरे मामले के बीच स्थानीय व्यापारियों और कुछ सामाजिक संगठनों ने एक और गंभीर सवाल उठाया है। उनका कहना है कि संबंधित ड्रग इंस्पेक्टर लंबे समय से एक ही क्षेत्र में तैनात हैं, जबकि सामान्य प्रशासनिक नियमों के तहत किसी भी अधिकारी को एक ही पद या स्थान पर निर्धारित समय से अधिक नहीं रखा जाता। इसके बावजूद अब तक उनका स्थानांतरण न होना नियमावली के उल्लंघन की ओर इशारा करता है। सूत्रों के अनुसार, स्थानांतरण नीति में स्पष्ट प्रावधान होते हैं कि पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए समय-समय पर अधिकारियों का तबादला किया जाए। ऐसे में वर्षों से एक ही स्थान पर जमे रहना न केवल प्रशासनिक प्रक्रिया पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि स्थानीय स्तर पर प्रभाव और दबाव की स्थिति भी पैदा कर सकता है।
प्रेस वार्ता में यह भी आरोप लगाए गए कि निरीक्षण के दौरान कथित तौर पर मेडिकल स्टोरों पर सख्ती दिखाते हुए ताले लगाए जाते हैं और फिर संचालकों को कार्यालय बुलाया जाता है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है, लेकिन क्षेत्र में इस तरह की चर्चाएं आम हैं।
प्राइड फार्मा कंपनी और कांग्रेस नेता कैश खुराना ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए, संबंधित अधिकारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाए और उनकी संपत्ति की भी जांच हो। साथ ही, स्थानांतरण नियमावली के पालन की भी जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए।
फिलहाल इस मामले में ड्रग इंस्पेक्टर अनीता भारती की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। वहीं, जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने भी जांच को लेकर कोई स्पष्ट स्थिति सार्वजनिक नहीं की है।
मामले के सामने आने के बाद अब न सिर्फ भ्रष्टाचार के आरोप बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था और स्थानांतरण नीति के पालन पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन इस पूरे प्रकरण में क्या कदम उठाता है और क्या निष्पक्ष जांच के जरिए सच्चाई सामने आ पाती है।
