134-ए निःशुल्क शिक्षा आंदोलन: हाईवे जाम केस में हरिद्वार के समाजसेवी सोकेन्द्र बालियान सहित 6 लोग बरी — 10 साल पुराने मामले में आया बड़ा फैसला

पानीपत, 2 दिसंबर 2025

2013–14 — में बड़े स्तर पर फॉर्म भरे गए, टेस्ट हुआ, दाखिले शुरू।
सरकारों ने नियम को कमजोर करने के कई प्रयास किए।
कई जिलों में आंदोलनकारियों पर मुकदमे लगाए गए।
2022 — लंबे संघर्ष के बावजूद राजनैतिक–स्कूल–सिस्टम की मिलीभगत से नियम लगभग रद्द कर दिया गया।

फॉर्म फरवरी–मार्च में भरे जाते थे।

टेस्ट/लॉटरी के आधार पर बच्चों का चयन।

निजी स्कूलों में अनिवार्य दाखिला।

दाखिला न देने वाले स्कूलों पर कानूनी कार्रवाई।

फीस प्रतिपूर्ति सरकार द्वारा।

BPL/EWS

वार्षिक आय 2 लाख तक

नर्सरी–12वीं (बाद में कक्षा 2–12)

सोकेन्द्र बालियान ने घोषणा की कि—

✔ 360° दृष्टि सेवा-समाधान मिशन
✔ 2 जमा 5 मुद्दे जन आंदोलन संस्था
अब और संगठित तरीके से शिक्षा अधिकार की लड़ाई लड़ेंगे।

134-ए को दोबारा लागू करवाना
— या चिराग योजना को 134-ए मॉडल में बदलना, ताकि सभी पात्र बच्चों को निजी स्कूलों में निःशुल्क शिक्षा मिले।

10 लाख बच्चों को निःशुल्क गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने का लक्ष्य।

5 लाख बच्चों के लिए निःशुल्क ट्यूशन सेंटर शुरू किए जाएंगे।

कोर्ट से लेकर सड़क तक आंदोलन जारी रहेगा।

अंतिम संदेश — संघर्ष जारी रहेगा
“सत्य की राह कठिन होती है, पर जीत निश्चित होती है।
134-ए आंदोलन गरीब बच्चों, अभिभावकों और समाज के अधिकारों की ऐतिहासिक जीत है।”

सत्यमेव जयते।

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