राजकुमार
हरिद्वार। थाना रानीपुर BHEL बहादराबाद क्षेत्र के दादूपुर सलेमपुर के पास दो बड़ी गंग नहरों के बीच सिंचाई विभाग की जमीन पर कई सालों से एक विशाल दरगाह बनी हुई थी। उत्तराखंड सरकार के आदेश पर सिंचाई विभाग की टीम ने इस दरगाह को पूरी तरह समतल कर दिया। इस कार्यवाही को लेकर स्थानीय स्तर पर आज दिनभर चर्चा बनी रही।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या विभाग इसी तरह बाक़ी अवैध कब्जों पर भी कार्यवाही करेगा या नहीं?
सबसे बड़ा सवाल: एक दरगाह हटा दी – होटल क्यों बचा हुआ है?
स्थानीय लोगों का कहना है कि सिंचाई विभाग की जमीन पर अवैध कब्जों की सूची लंबी है, जिस पर एक–एक कर कार्रवाई होनी चाहिए।
सबसे चर्चित मामला कनखल/इंदिरा बस्ती क्षेत्र में सिंचाई विभाग की भूमि पर बने एक होटल का है। इस होटल को लेकर विभाग तक कई बार लिखित शिकायतें पहुँचीं। विभाग द्वारा बार-बार नोटिस जारी होने के बावजूद आज तक होटल स्वामी पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
स्थानीय लोग बोले – क्या चयनित कार्यवाही?
ऐसा प्रतीत हो रहा है कि विभाग की कार्यवाही “चयनित” तरीके से हो रही है। एक विशाल दरगाह को तो सरकारी आदेश पर एक ही बार में गिरा दिया गया, लेकिन सरकारी भूमि पर बना होटल आज भी ज्यों का त्यों खड़ा है।
लोग पूछ रहे हैं:
क्या सिंचाई विभाग के अधिकारी होटल से जुड़े दबाव में हैं?
क्या होटल मालिक को कुछ सफेदपोशों का संरक्षण मिला हुआ है?
अवैध कब्जों की सूची सरकार तक पहुँचती है या नहीं?
जनता की मांग – होटल को भी तत्काल ध्वस्त किया जाए
इंदिरा बस्ती, दादूपुर–सलेमपुर व आसपास के क्षेत्रों के लोगों का कहना है कि जिस तरह दरगाह को एक आदेश में समतल किया गया, उसी तरह सिंचाई विभाग की बाकी जमीनों पर हुए कब्जों को भी मुक्त कराया जाए।
स्थानीय निवासियों का स्पष्ट कहना है कि:
“सरकारी भूमि किसी धर्म, जाति, समुदाय के नाम पर कब्जा नहीं होनी चाहिए। नियम सबके लिए एक जैसे हों।”
अब निगाहें जिला प्रशासन व सिंचाई विभाग पर
अब देखना यह होगा कि एक दरगाह गिराने के बाद विभाग कहीं सिर्फ खानापूर्ति भर तो नहीं कर रहा…?
क्या कनखल क्षेत्र में सिंचाई विभाग की जमीन पर बना होटल भी कानून की ज़द में आएगा, या फिर इस होटल को “संरक्षण” प्राप्त होने के कारण विभाग की कार्रवाई सिर्फ नोटिस भेजने तक ही सीमित रह जाएगी?
