एडवोकेट शुभम भारद्वाज:
हरिद्वार के भूपतवाला क्षेत्र में एक निर्माणाधीन अपार्टमेंट का मामला गंभीर रूप से सामने आया है, जहां यह निर्माण फॉरेस्ट लेंड से मात्र 50 मीटर की दूरी पर किया जा रहा है। यह निर्माण न केवल NGT (National Green Tribunal) के निर्धारित पर्यावरणीय मानकों के विपरीत है बल्कि वन एवं वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के नियमों का भी स्पष्ट उल्लंघन करता है।
क्या कहते हैं NGT और वन विभाग के नियम?
NGT नियमों के अनुसार:
संरक्षित वन क्षेत्र के 300 मीटर से कम दूरी पर किसी भी प्रकार का भारी ढांचागत निर्माण बिना पूर्व अनुमति अवैध माना जाता है। निर्माण कार्य शुरू करने से पहले पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (Environmental Impact Assessment – EIA) और No Objection Certificate (NOC) लेना अनिवार्य है।
वनभूमि के पास निर्माण होने की स्थिति में प्रोजेक्ट को Wildlife Clearance लेना होता है ताकि वन्यजीवों पर इसका दुष्प्रभाव न पड़े।
वन विभाग भी चिंतित — क्षेत्र हाथियों का कॉरिडोर
स्थानीय लोगों और वन विभाग के अनुसार जिस सड़क के पास यह अपार्टमेंट बनाए जा रहे है, वहां पर नियमित रूप से जंगली जानवर, खासकर हाथियों का आवागमन रहता है।
यह क्षेत्र राजाजी टाइगर रिजर्व का इको-सेंसिटिव ज़ोन (ESZ) माना जाता है जहाँ:
जंगली जानवरों का प्राकृतिक मार्ग (Wildlife Corridor)
हाथियों के झुंड का नियमित मूवमेंट
वन्यजीवों के लिए प्राकृतिक संसाधन उपलब्ध होते हैं।
ऐसी स्थिति में भारी कंक्रीट निर्माण:
वन्यजीवों के रास्तों को बाधित कर सकता है
मानव-वन्यजीव संघर्ष (Human-Wildlife Conflict) बढ़ा सकता है
हाथियों को उग्र होने की स्थिति में मजबूर कर सकता है
स्थानीय निवासियों ने उठाई आपत्ति
स्थानीय लोगों का कहना है कि:
“पहले भी इस इलाके में हाथियों और तेंदुए का मूवमेंट देखा जा चुका है। अगर यहां बहुमंजिला अपार्टमेंट बन गया तो वन्यजीवों का आवागमन बाधित होगा और भविष्य में यह क्षेत्र संघर्ष का हॉटस्पॉट बन सकता है।”
अनुमतियों पर प्रश्नचिह्न
सूत्रों के अनुसार अब तक इस निर्माण को लेकर:
HRDA,वन विभाग,NGT
नगर निगम,जल निकासी (Drainage/NOC),EIA Clearance की अनुमति प्राप्त है या नहीं — यह अभी स्पष्ट नहीं है।
निष्कर्ष
भूपतवाला में फॉरेस्ट लेंड के इतने निकट निर्माण कार्य न केवल पर्यावरणीय और कानूनी नियमों की अवहेलना है बल्कि भविष्य में मानव और वन्यजीवों के संघर्ष तथा पर्यावरणीय असंतुलन का कारण बन सकता है। स्थानीय लोगों ने इस निर्माण को तुरंत रोकने, जांच कराने और NGT में याचिका दाखिल करने की मांग की है।
📌 यदि संबंधित विभाग कार्रवाई नहीं करते तो यह मामला हरिद्वार की पर्यावरणीय सुरक्षा के लिए भविष्य में बड़ा खतरा बन सकता है।
