(एडवोकेट शुभम भारद्वाज)
हरिद्वार। कनखल क्षेत्र स्थित इंदिरा बस्ती में सिंचाई विभाग सरकारी भूमि पर बन रहे तीन मंजिला होटल को लेकर मामला तूल पकड़ता जा रहा है,बताया जा रहा है कि यह भूमि उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग की है, जिस पर एक स्थानीय दबंग द्वारा लंबे समय से अवैध कब्जा कर होटल निर्माण किया गया। स्थानीय लोगों की शिकायतों के बाद सिंचाई विभाग ने होटल स्वामी को दो बार नोटिस जारी किए, लेकिन इसके बावजूद न तो होटल स्वामी ने कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत किए और न ही विभाग ने कोई ठोस कार्रवाई की।
दो नोटिस, पर कार्रवाई शून्य — सवालों के घेरे में विभाग
सूत्रों के अनुसार, अवैध कब्जा करने वाले व्यक्ति ने बिना किसी अनुमति के सरकारी भूमि पर होटल खड़ा कर दिया। विभाग द्वारा भेजे गए नोटिसों को भी उसने गंभीरता से नहीं लिया और निर्माण यथावत जारी रखा।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि विभाग की भूमिका संदेहास्पद प्रतीत होती है। दो नोटिस जारी करने के बावजूद जहां अवैध निर्माण पर कार्रवाई नहीं की गई, वहीं होटल स्वामी से किसी भी प्रकार का स्वामित्व प्रमाण भी नहीं लिया गया। इस ढिलाई ने प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।
सफेदपोशों के संरक्षण का आरोप
इंदिरा बस्ती के निवासियों ने आरोप लगाया है कि अवैध होटल को कुछ प्रभावशाली सफेदपोशों का संरक्षण प्राप्त है। लोगों के मुताबिक, यही कारण है कि बिना नक्शा पास कराए, बिना भूमि स्वामित्व के और बिना अनुमति के तीन मंजिला होटल निर्बाध रूप से निर्मित कर लिया गया।
लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन की मंशा साफ होती तो पहली ही नोटिस पर कार्रवाई हो जानी चाहिए थी, लेकिन विभाग का लचर रवैया संदेह को और गहरा करता है।
जनता में बढ़ रहा रोष — “आज होटल, कल कोई और सरकारी जमीन…”
स्थानीय नागरिकों ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि विभाग ने इस अवैध कब्जे पर तत्काल प्रभाव से कार्रवाई नहीं की, तो आगे चलकर अन्य लोग भी इसी तरह सरकारी भूमि पर निर्माण करने को प्रेरित होंगे। यह भविष्य में बड़े पैमाने पर भूमि अतिक्रमण को जन्म दे सकता है।
लोगों ने होटल को तत्काल ध्वस्त करने, कब्जे की भूमि को मुक्त कराने और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई करने की मांग की है।
मामला पहुंचा मुख्यमंत्री तक —
जल्द हो सकती है ध्वस्तीकरण की कार्यवाही
सबसे बड़ी खबर यह है कि स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की शिकायत अब सीधे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक पहुंच चुकी है। सूत्रों के हवाले से बताया जा रहा है कि जल्द ही उच्चस्तरीय निर्देश जारी हो सकते हैं।
यदि सब कुछ ठीक रहा, तो इस अवैध होटल का ध्वस्तीकरण किसी भी समय शुरू हो सकता है। विभागीय अधिकारियों को सीएम ऑफिस से जवाब-तलब भी किया जा सकता है।
अब निगाहें जिला प्रशासन और सिंचाई विभाग पर
सवाल यह है कि क्या विभाग अब भी ढिलाई बरतेगा या फिर कानून के मुताबिक कार्रवाई करते हुए सरकार की ‘ज़ीरो टॉलरेंस’ नीति का पालन करेगा?
स्थानीय लोगों की निगाहें अब पूरी तरह से जिला प्रशासन, सिंचाई विभाग और मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर टिकी हैं।
आने वाले कुछ दिन यह तय कर देंगे कि दबंगई और साठगांठ हावी रहती है या कानून का शिकंजा कसता है।
