एडवोकेट शुभम भारद्वाज
हरिद्वार:- इंडस्ट्रियल एरिया में पर्यावरणीय उल्लंघन उजागर—राजाजी टाइगर रिजर्व से 20 मीटर दूर बने “फॉरेस्ट हिल” होटल पर गंभीर आरोप, सामने वन क्षेत्र में पेड़ काटकर तैयार की गई पार्किंग
हरिद्वार। पर्यावरण संरक्षण के कड़े कानूनों के बावजूद हरिद्वार इंडस्ट्रियल एरिया में संचालित “फॉरेस्ट हिल” होटल को लेकर बड़ा मामला सामने आया है। स्थानीय निवासियों ने आरोप लगाया है कि होटल के ठीक सामने वन भूमि पर खड़े हरे-भरे पेड़ों को काटकर अवैध पार्किंग बना दी गई है। यह पूरा क्षेत्र राजाजी टाइगर रिजर्व की सीमा से मात्र 20 मीटर की दूरी पर आता है, जो इसे अत्यंत संवेदनशील बनाता है। हैरानी की बात यह है कि स्वयं यह होटल भी इको-सेंसिटिव ज़ोन के बेहद करीब बना हुआ है।
🌳 वन क्षेत्र में खुलेआम पेड़ों की कटाई,
सूत्रों के अनुसार वन क्षेत्र में दर्जनों छोटे बड़े पेड़ पौधे काटे गए, जिसके बाद भूमि को समतल कर होटल की पार्किंग के रूप में उपयोग किया जा रहा है। इस अवैध गतिविधि से वन्यजीवों के प्राकृतिक मार्ग और पारिस्थितिकी तंत्र पर गंभीर प्रभाव पड़ने की आशंका है।
🏨 इको-सेंसिटिव ज़ोन में होटल निर्माण भी सवालों के घेरे में
स्थानीय लोगों और पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार फॉरेस्ट हिल होटल स्वयं राजाजी टाइगर रिजर्व के इको-सेंसिटिव ज़ोन (ESZ) की सीमा के बेहद नजदीक बना हुआ है।
NGT, सुप्रीम कोर्ट और पर्यावरण मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अनुसार::
इको-सेंसिटिव ज़ोन में 100 मीटर तक किसी भी प्रकार का निर्माण, वाणिज्यिक गतिविधि या भूमि उपयोग परिवर्तन प्रतिबंधित रहता है।
होटल, रिसॉर्ट, मैरिज हॉल या किसी भी पर्यटन-संबंधित व्यावसायिक संरचना के लिए पर्यावरणीय अनुमति (Environmental Clearance) अनिवार्य है।
NGT के पूर्व निर्णयों के अनुसार,
संरक्षित जंगलों के पास स्थित होटल या रिसॉर्ट वन्यजीवों के माइग्रेशन रूट को बाधित करते हैं।
रात के समय होटल की लाइट, म्यूज़िक और वाहन गतिविधि वन्यजीवों में तनाव और संघर्ष बढ़ाती है।
राजाजी टाइगर रिजर्व भारत के 50 प्रमुख टाइगर रिज़र्व में शामिल है, इसलिए इसके आसपास किसी भी निर्माण या गतिविधि पर अतिरिक्त सतर्कता और अनुमति आवश्यक है।
यदि होटल ESZ सीमा के भीतर आता है और बिना उचित NOC या पर्यावरणीय अनुमति के बनाया गया है, तो यह नियमों का सीधा उल्लंघन माना जाएगा।
विशेषज्ञों के अनुसार,
होटल और पार्किंग की लगातार मानव गतिविधि,वाहनों की आवाजाही रात्रिकालीन रोशनी
इन सब से वन्यजीवों के मूवमेंट और सुरक्षा पर गंभीर खतरा उत्पन्न होता है।
विशेषकर हाथियों का पारंपरिक कॉरिडोर इस क्षेत्र से गुजरने की संभावना बताई जाती है, जिस पर पार्किंग और होटल की गतिविधियां प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती हैं।
📌 स्थानीय लोगों की मांग – जांच हो और कार्रवाई भी
स्थानीय निवासियों और पर्यावरण प्रेमियों ने आरोप लगाया है कि:
होटल का निर्माण स्वयं विवादित है
संबंधित अधिकारी की अनदेखी
लोगों ने DFO हरिद्वार, वन विभाग, NGT और जिला प्रशासन से इस पूरे मामले की जांच कर अवैध पार्किंग और NGT उल्लंघन के लिए जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग की है।
📣 प्रशासन पर उठ रहे सवाल
लोगों का कहना है कि राजाजी टाइगर रिजर्व जैसे संवेदनशील वन्यजीव क्षेत्र के नजदीक होटल और पार्किंग का संचालन बिना अनुमति कैसे चल रहा है?
क्या वन विभाग और जिला प्रशासन को इस अवैध गतिविधि की जानकारी नहीं है? या फिर जानबूझकर मामले को अनदेखा किया जा रहा है?
