हरिद्वार: राजाजी टाइगर रिज़र्व के इको-सेंसिटिव क्षेत्र में बना होटल, NGT नियमों की खुलेआम धज्जियां, STP नियमों के उल्लंघन के भी गंभीर आरोप

स्थानीय लोगों के अनुसार होटल के सामने स्थित वन पट्टी में पिछले दिनों कई पेड़ काटे गए। कटाई के बाद जमीन को समतल कर उसे पार्किंग के रूप में बदल दिया गया। यह पूरा क्षेत्र वन्यजीवों के मूवमेंट रूट के बेहद करीब है, जहां इस तरह की गतिविधियाँ NGT नियमावली के अनुसार सख्त वर्जित हैं।

पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि फॉरेस्ट हिल होटल इको-सेंसिटिव ज़ोन (ESZ) की कड़ी शर्तों के बीच आता है। ऐसे क्षेत्र में होटल अथवा किसी भी वाणिज्यिक भवन के निर्माण के लिए अनिवार्य होता है—

पर्यावरणीय अनुमति (Environmental Clearance)

वन विभाग और जिला प्रशासन की NOC

भू-उपयोग परिवर्तन (Land Use Change) की अनुमतियाँ

यदि इनमें से कोई अनुमति नहीं ली गई है, तो यह सीधा-सीधा NGT नियमों का उल्लंघन है।

50 बिस्तरों से अधिक क्षमता वाले प्रत्येक होटल में STP होना अनिवार्य है।

होटल से निकलने वाला सारा सीवेज पानी बिना उपचार के नालों या प्राकृतिक जलधारा में नहीं छोड़ा जा सकता।

STP की क्षमता और उसका संचालन नियमित रूप से प्रमाणित होना चाहिए।

इको-सेंसिटिव ज़ोन और वन क्षेत्र के पास स्थित किसी भी होटल की सीवेज व्यवस्था की विशेष निगरानी अनिवार्य है।

स्थानीय स्रोतों के अनुसार फॉरेस्ट हिल होटल में STP या तो मौजूद नहीं है या सही ढंग से काम नहीं कर रही—जो जल प्रदूषण और पर्यावरणीय खतरे को कई गुना बढ़ा सकता है।

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