(एडवोकेट शुभम भारद्वाज)
हरिद्वार। कनखल क्षेत्र की इंदिरा बस्ती में सरकारी भूमि पर खड़े किए गए तीन मंजिला अवैध होटल “शुकून” को लेकर मामला अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। लगातार उठते विरोध, मीडिया की खबरों और स्थानीय लोगों की शिकायतों के बाद उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग (UP Irrigation) अब सख्त मोड में आ गया है। विभागीय टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच की और पहली बार आधिकारिक तौर पर स्वीकार किया कि होटल पूरी तरह से सिंचाई विभाग की भूमि पर अवैध रूप से निर्मित किया गया है।
विभाग ने होटल स्वामी को 15 दिन की अंतिम मोहलत देते हुए सभी वैध दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा है। निर्धारित समय में शाक्य प्रस्तुत न करने पर अग्रिम कार्रवाई शुरू की जाएगी।

कैसे शुरू हुआ विवाद — वर्षों पुराना कब्जा और विभाग की अनदेखी
स्थानीय नागरिकों के अनुसार, इंदिरा बस्ती में एक प्रभावशाली व्यक्ति ने लंबे समय से सिंचाई विभाग (UP) की सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा कर रखा था। आरोप है कि धीरे-धीरे इस कब्जे को पक्का निर्माण में बदला गया और बिना किसी अनुमति के होटल “शुकून” का निर्माण कर दिया गया।

हैरानी की बात यह है कि —
न नक्शा पास कराया गया
न भूमि का स्वामित्व प्रमाण प्रस्तुत किया गया
न ही किसी विभागीय अनुमति की प्रक्रिया पूरी की गई
इसके बावजूद होटल तीन मंजिल तक खड़ा हो गया और विभाग ने दो नोटिस जारी करने के बाद भी कोई कठोर कार्रवाई नहीं की, जिससे स्थानीय लोग विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठाने लगे।

NGT दिशानिर्देशों का खुला उल्लंघन
सूत्रों के अनुसार होटल का निर्माण न सिर्फ सरकारी भूमि पर बल्कि NGT के उन नियमों का भी उल्लंघन करता है, जिनमें नदी, नाले, जंगल क्षेत्र और संवेदनशील ज़ोन के आसपास अवैध निर्माण को प्रतिबंधित किया गया है।
इसी वजह से यह मामला और गंभीर हो गया है।

खबर का असर — विभाग की टीम मौके पर पहुंची,
मीडिया में मुद्दा उठने के बाद सिंचाई विभाग हरकत में आया।
विभाग की टीम ने इंदिरा बस्ती पहुंचकर स्थल निरीक्षण किया और स्पष्ट किया कि —
होटल पूरी तरह से सिंचाई विभाग की भूमि पर बना है।
विभाग द्वारा भेजे दोनों नोटिसों पर होटल स्वामी ने अब तक एक भी वैध दस्तावेज नहीं दिए।
निर्माण पूरी तरह अवैध और नियम विरुद्ध है।
होटल को 15 दिन का समय दिया गया है, जिसके बाद अग्रिम कार्रवाई शुरू होगी।
मामला पहुंचा मुख्यमंत्री तक — हरकत में आला अधिकारी
सूत्रों के मुताबिक, यह विवाद अब सीधे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक पहुंच चुका है।
संभावना है कि जल्द ही सीएम कार्यालय से जिले के अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी जा सकती है
विभाग को कठोर कार्रवाई के निर्देश मिल सकते हैं

जनता में बढ़ता आक्रोश — “आज होटल, कल और भी सरकारी जमीनें…”
स्थानीय नागरिकों ने स्पष्ट कहा कि यदि इस मामले में सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो भविष्य में लोग सरकारी संपत्ति पर इसी तरह कब्जा बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित होंगे।
जनता की मांगें:
होटल का तत्काल ध्वस्तीकरण
कब्जे की भूमि को मुक्त कराना
लापरवाही दिखाने वाले विभागीय कर्मियों पर भी कार्रवाई
अगले 15 दिन निर्णायक — कानून जीतेगा या दबंगई?
अब सबकी नजरें जिला प्रशासन, सिंचाई विभाग और मुख्यमंत्री कार्यालय पर टिकी हैं।
अगले 15 दिन यह तय करेंगे कि —
अवैध कब्जाधारी पर कानून चलेगा,
या दबंगई और संरक्षण के चलते कार्रवाई टलती जाएगी।
फिलहाल, विभागीय जांच और मीडिया के दबाव के बाद एक बात साफ है, कि अवैध होटल “शुकून” का भविष्य अब अधर में लटका है और ध्वस्तीकरण कभी भी शुरू हो सकता है।
