हरिद्वार में गंगा घाट का निर्माण, गंगा किनारे खड़े सैकड़ों पेड़ काटे गए, NGT नियमावली का खुला उल्लंघन,

▪️नदी के किनारे एक निश्चित दायरे में निर्माण कार्य प्रतिबंधित या नियंत्रित होता है

▪️किसी भी परियोजना से पहले Environmental Impact Assessment (EIA) कराना अनिवार्य है

▪️प्राकृतिक तंत्र, हरित क्षेत्र और नदी प्रवाह को नुकसान नहीं पहुंचाया जा सकता

▪️ऐसे में यदि घाट निर्माण कार्य बिना इन प्रक्रियाओं का पालन किए किया गया है, तो यह NGT के आदेशों का सीधा उल्लंघन माना जाएगा विशेषज्ञों का मानना है कि गंगा के तटीय क्षेत्रों को Eco-Sensitive Zone और कई स्थानों पर Flood Plain Zone माना जाता है, हरिद्वार जैसे धार्मिक और संवेदनशील क्षेत्रों में नियम और अधिक सख्त होते हैं

यदि वन विभाग द्वारा पेड़ों की कटाई की अनुमति दी गई है, तो अब यह जांच का विषय बन गया है, क्या अनुमति देते समय सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया गया? क्या NGT के दिशा-निर्देशों और पर्यावरणीय मंजूरी (EC) को ध्यान में रखा गया?
क्या उच्च स्तर (केंद्र/राज्य) से आवश्यक स्वीकृति प्राप्त की गई?
यदि इन बिंदुओं की अनदेखी हुई है, तो वन विभाग की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ सकती है।

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