लखनऊ, यूपी।
उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य विभाग ने सरकारी डॉक्टरों के लिए सख्त गाइडलाइन जारी कर दी है। अब सरकारी अस्पतालों में मरीजों को सिर्फ स्टोर में उपलब्ध सरकारी दवाएं ही लिखी जाएंगी। यदि कोई डॉक्टर अस्पताल की दवाओं की जगह बाहर की दवा लिखते हुए पाया गया तो उसके खिलाफ तत्काल सस्पेंशन की कार्रवाई की जाएगी।
स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अमित कुमार घोष ने साफ चेतावनी दी है कि इसके लिए कोई बहाना या सफाई स्वीकार नहीं की जाएगी।
साथ ही अस्पताल में डॉक्टरों की उपस्थिति को लेकर भी कड़ा रुख अपनाया गया है। अगर डॉक्टर अपनी ड्यूटी से अनुपस्थित पाए गए तो इस स्थिति में संबंधित अस्पताल के CMS (मुख्य चिकित्सा अधीक्षक) को भी जिम्मेदार माना जाएगा।
सरकार का कहना है कि इस फैसले का उद्देश्य सरकारी अस्पतालों में आने वाले मरीजों को बिना खर्च इलाज और मुफ्त दवाएं उपलब्ध कराना है। विभाग का मानना है कि बाहर की दवा लिखने से मरीजों पर अनावश्यक आर्थिक भार बढ़ता है और सरकारी अस्पतालों की दवा व्यवस्था पर भी सवाल उठते हैं।
अब नए निर्देशों के तहत –
सिर्फ अस्पताल स्टोर से उपलब्ध दवाएं ही लिखें
बाहर की दवा लिखी तो सीधे सस्पेंशन
डॉक्टर अनुपस्थित मिले तो CMS जिम्मेदार
स्वास्थ्य विभाग ने सभी जिलों को आदेश जारी कर दिए हैं और सरकारी अस्पतालों से तत्काल निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित करने को कहा है।
