हरिद्वार। 24 घंटे शव वाहन चलाकर और जरूरतमंदों को निशुल्क शव फ्रीजर उपलब्ध कराकर समाजसेवा करने वाले लकी शर्मा आज दुनिया से चले गए, लेकिन दुखद यह है कि सरकारी लापरवाही ने उनकी अंतिम गरिमा भी छीन ली।
सूत्रों के अनुसार, जिस फ्रीजर में शव को सुरक्षित रखा जाना था, वह महीनों से खराब पड़ा था। अस्पताल प्रशासन की इस घोर लापरवाही के कारण शव को एक ऐसे फ्रीजर में रखा गया जिसे ठीक किए बिना ही इस्तेमाल किया जा रहा था—और उसी खराब फ्रीजर में चूहों द्वारा शव को कुतरने की दर्दनाक घटना सामने आई, जिसने पूरे शहर को झकझोर दिया है। स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस घटना को हरिद्वार के स्वास्थ्य तंत्र की “मृत अवस्था” का प्रतीक बताया है। उनका कहना है कि यह सिर्फ एक शव का अपमान नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम के मर चुके ज़मीर का प्रमाण है। लोगों का आरोप है कि हरिद्वार के सरकारी अस्पताल में सुविधाएँ शून्य, जिम्मेदारी शून्य, और इंसान की इज़्ज़त मौत के बाद भी सुरक्षित नहीं।
घटना के बाद आक्रोशित लोगों ने सीएमओ हरिद्वार के खिलाफ कठोर धाराओं में मुकदमा दर्ज करने और तत्काल बर्खास्तगी की मांग की है। उनका कहना है कि सरकार हरिद्वार के साथ सौतेला व्यवहार कर रही है और बुनियादी चिकित्सा सुविधाएँ तक उपलब्ध नहीं हैं। लकी शर्मा एक सामाजिक, मददगार और संवेदनशील व्यक्ति थे। अपने जीवन में वे बिना किसी स्वार्थ के लोगों को 24 घंटे शव वाहन और फ्रीजर सुविधा उपलब्ध कराते थे। लेकिन विडंबना यह है कि जिस सिस्टम की कमी को वे अपने स्तर पर पूरा करते थे, उसी सिस्टम ने उनकी अंतिम यात्रा को भी अपमानित कर दिया। स्थानीय जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और शहरवासियों ने इस मामले में माननीय मुख्यमंत्री से तुरंत कठोर कार्रवाई की मांग की है, ताकि ऐसी अमानवीय घटनाएं दोबारा न हों।
