एडवोकेट शुभम भारद्वाज
हरिद्वार। प्रदेश में लगातार सामने आ रहे घोटालों की कड़ी में अब शिक्षा विभाग भी सवालों के घेरे में है। कभी मनरेगा घोटाला, कभी नंदा गौरा योजना में अनियमितता, तो कभी छात्रवृत्ति घोटाले—सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। प्रशासन समय-समय पर कार्रवाई भी करता है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि कई मामलों में विभागीय अनदेखी ही भ्रष्टाचार की सबसे बड़ी वजह बन रही है।
बीते दिनों हरिद्वार के बहादराबाद क्षेत्र में खंड शिक्षा अधिकारी को विजिलेंस टीम द्वारा 20 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया जाना इसी ओर इशारा करता है कि शिक्षा विभाग में सब कुछ ठीक नहीं है।
यह किस श्रेणी का अपराध है?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि किसी अधिकारी की जानकारी में नियम विरुद्ध स्कूल संचालित हो रहे हैं और फिर भी कोई कार्रवाई नहीं होती, तो इसे किस श्रेणी का अपराध माना जाए—
प्रशासनिक लापरवाही
पद का दुरुपयोग
या संगठित भ्रष्टाचार?
सैकड़ों स्कूल नियमावली के विरुद्ध संचालित
सूत्रों के अनुसार जनपद हरिद्वार में सैकड़ों निजी स्कूल शिक्षा विभाग की नियमावली का उल्लंघन करते हुए संचालित हो रहे हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि ब्लॉक बहादराबाद ब्लॉक क्षेत्र में कई स्कूलों की मान्यता केवल कक्षा 8 तक है, लेकिन वहां कक्षा 9 से 12 तक के छात्र-छात्राओं को पढ़ाया जा रहा है। यह न केवल शिक्षा अधिनियम का उल्लंघन है, बल्कि बच्चों के भविष्य के साथ खुला खिलवाड़ भी है।
स्कूल संचालन की अनिवार्य नियमावली (Rule Book)
किसी भी निजी स्कूल को संचालित करने के लिए निम्नलिखित नियमों का पालन अनिवार्य है:
- शिक्षा विभाग से मान्यता
प्राथमिक (1–5)
उच्च प्राथमिक (6–8)
माध्यमिक (9–10)
उच्च माध्यमिक (11–12)
👉 बिना मान्यता उच्च कक्षाएं चलाना पूर्णतः अवैध है
किसी भी निजी स्कूल को चलाने के लिए निम्न विभागों से NOC अनिवार्य होती है:
- शिक्षा विभाग (मुख्य)
मान्यता प्रमाणपत्र
कक्षा-वार अनुमति
- नगर निगम / नगर पंचायत
भवन का व्यावसायिक उपयोग
टैक्स व रजिस्ट्रेशन
- अग्निशमन विभाग (Fire NOC)
फायर सेफ्टी
आपातकालीन निकास
अग्निशमन उपकरण
- लोक निर्माण विभाग / प्रमाणित इंजीनियर
भवन की संरचनात्मक सुरक्षा (Building Safety Certificate) - स्वास्थ्य विभाग
स्वच्छ पेयजल
शौचालय व्यवस्था
साफ-सफाई प्रमाणपत्र
- प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (जहां आवश्यक हो)
पर्यावरण मानकों की पुष्टि - पुलिस विभाग (कुछ मामलों में)
ट्रैफिक व सुरक्षा व्यवस्था
RTE Act का खुला उल्लंघन
बिना मान्यता कक्षा संचालन करना Right to Education Act, 2009 के तहत दंडनीय अपराध है।
इसके अंतर्गत—
स्कूल की मान्यता रद्द की जा सकती है
भारी जुर्माना लगाया जा सकता है
स्कूल को सील किया जा सकता है
शिक्षा विभाग की चुप्पी सवालों के घेरे में
सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि—
इतने वर्षों से संचालित इन यह स्कूलो पर विभागीय निरीक्षण क्यों नहीं हुआ? क्या अधिकारियों की मिलीभगत से यह सब संभव हुआ?
यदि विभाग की जानकारी में ऐसे स्कूल हैं और फिर भी कोई कार्रवाई नहीं होती, तो यह सीधी-सीधी विभागीय संरक्षण की श्रेणी में आता है।
अब जरूरी है उच्च स्तरीय जांच
जनपद हरिद्वार में शिक्षा व्यवस्था की सच्चाई सामने लाने के लिए—
जिला स्तरीय या विजिलेंस जांच
सभी निजी स्कूलों का भौतिक सत्यापन
मान्यता बनाम संचालित कक्षाओं की जांच
जिम्मेदार अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई
निष्कर्ष
बिना मान्यता स्कूल चलाना सिर्फ नियमों का उल्लंघन नहीं, बल्कि बच्चों के भविष्य के साथ अपराध है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर कठोर कदम उठाता है या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाता है।
