हरिद्वार: ज्वालापुर क्षेत्र जूश कंट्री के पीछे अवैध कॉलोनी का धड़ल्ले से काटना,जारी,HRDA–RERA–बिल्डिंग बायलॉज सभी नियम ताक पर

हरिद्वार। ज्यूडिशियल रिसर्च कंट्री (JRC) के पीछे के क्षेत्र में इन दिनों तेज़ी से अवैध प्लॉटिंग और कॉलोनीकरण का खेल खुलकर सामने आ रहा है। कृषि भूमि पर बिना किसी अनुमति, नक्शा पास कराए बिना और न ही किसी प्रकार की रेरा पंजीकरण प्रक्रिया पूरी किए बिना कॉलोनी काटी जा रही है। स्थानीय लोगों ने हरिद्वार रुड़की विकास प्राधिकरण (HRDA) की चुप्पी और उदासीनता पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

किसी भी भूमि का भू-उपयोग परिवर्तन (Land Use Change) कराना अनिवार्य है।

कॉलोनी विकसित करने के लिए लेआउट प्लान स्वीकृत कराना जरूरी होता है।

250 वर्गमीटर से अधिक के प्लॉटों का नक्शा पास कराना अनिवार्य है।

सड़क, नाली, बिजली, पार्क सीवर लाइन और सार्वजनिक स्थल हेतु आरक्षित भूमि का प्रावधान जरूरी है।
लेकिन JRC के पीछे काटी जा रही कॉलोनी में इनमें से किसी भी नियम का पालन नहीं किया गया है। कृषि भूमि को सीधे प्लॉटों में बांटकर बेचा जा रहा है।

किसी भी प्रोजेक्ट जिसका क्षेत्रफल 500 वर्गमीटर या 8 प्लॉट से अधिक हो, उसका RERA में पंजीकरण अनिवार्य है।

बिना RERA नंबर के प्लॉट/फ्लैट बेचना, विज्ञापन देना, प्रस्तावित करना भी अपराध की श्रेणी में आता है।

खरीदारों को प्रोजेक्ट की जानकारी, लेआउट प्लान, स्वीकृतियाँ और समयसीमा बताना डेवलपर की कानूनी जिम्मेदारी होती है।

लेकिन इस कॉलोनी में न RERA पंजीकरण है, न अनुमोदित नक्शा। फिर भी खुलेआम प्लॉटों की बिक्री और मार्केटिंग की जा रही है।

किसी भी निर्माण से पूर्व सेटबैक, ग्राउंड कवरेज, ऊँचाई सीमा, पार्किंग, सेफ्टी स्टैंडर्ड का पालन अनिवार्य है। बिना नक्शा पास कराए निर्माण शुरू करना दंडनीय अपराध है। कॉलोनी में कई स्थानों पर बिना अनुमति के मकान निर्माण भी प्रारंभ कर दिया गया है, जो स्पष्ट रूप से बिल्डिंग बायलॉज का उल्लंघन है।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि कई बार विभाग को अवगत कराने के बाद भी: HDA की ओर से कोई रोक-टोक नहीं, न ही मौके पर टीम भेजी गई, न ही भूमि उपयोग की जांच की गई। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर इतनी बड़ी प्लॉटिंग माफिया गतिविधि प्रशासन की नज़र से कैसे छिपी रह गई?

रेरा में पंजीकरण न होने और नक्शा पास न होने वाली कॉलोनी में प्लॉट खरीदने पर भविष्य में—

बिजली–पानी के कनेक्शन में दिक्कत,

मकान पर सीलिंग की कार्रवाई,

सड़क–नाली जैसी सुविधाओं की कमी,

कानूनी विवाद और आर्थिक नुकसान जैसी गंभीर समस्याएँ सामने आ सकती हैं।

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