🌳 हरिद्वार | विशेष रिपोर्ट
जनपद हरिद्वार के ग्राम कांगड़ी क्षेत्र में वृक्ष कटाई और कॉलोनी निर्माण से जुड़ा एक बड़ा मामला उजागर हुआ है। उद्यान विभाग द्वारा यहां के एक बाग मालिक को 12 आम वृक्षों के पातन की अनुमति दी गई थी (अनुज्ञा संख्या: 39/2024-25), लेकिन स्थानीय स्तर पर हुई जांच में यह तथ्य सामने आया है कि उक्त स्थल पर लगभग 115 आम और लीची के वृक्षों को काट दिया गया।
संबंधित अनुमति शर्तों में विभाग द्वारा यह स्पष्ट रूप से उल्लेखित था कि निर्धारित संख्या से अधिक वृक्ष काटने पर अनुमति स्वतः निरस्त मानी जाएगी तथा संबंधित के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई अनिवार्य होगी।इसके बावजूद इस स्थान पर बड़े पैमाने पर पातन किया गया और इसके बाद अब उसी भूमि पर कॉलोनी विकसित की जा रही है।
हाई टेंशन लाइन के नीचे काटी जा रही कॉलोनी
जांच में एक और महत्वपूर्ण तथ्य यह सामने आया है कि इस भूमि के ऊपर से 132 केवी हाई टेंशन विद्युत लाइन गुजरती है। इतनी उच्च क्षमता वाली विद्युत लाइन के नीचे किसी भी प्रकार के स्थायी निर्माण की अनुमति नहीं होती।
Central Electricity Authority (Safety Regulations 2010)
Uttarakhand Building Bye-Laws 2011
NGT Act 2010
इन सभी प्रावधानों के अनुसार बिना पर्यावरणीय अनापत्ति (EC) के तथा विद्युत सुरक्षा मानकों के बिना ऐसे क्षेत्रों में निर्माण / प्लॉटिंग पूरी तरह प्रतिबंधित है।
HRDA की कार्रवाई पर सवाल
हरिद्वार विकास प्राधिकरण (HRDA) द्वारा पिछले कुछ समय से अवैध कॉलोनियों के विरुद्ध लगातार कार्रवाई की जा रही है। कई स्थानों पर अवैध प्लॉटिंग और निर्माणों पर सीलिंग एवं ध्वस्तीकरण की कार्यवाही हो चुकी है।लेकिन ग्राम कांगड़ी क्षेत्र में चल रही उक्त कॉलोनी पर अभी तक कोई कार्यवाही नहीं हुई है।स्थानीय ग्रामवासी इसे लेकर लगातार आपत्ति जता रहे हैं और इस मुद्दे को अब विभिन्न विभागों तक पहुंचाया जा रहा है।
ग्रामीणों की मांग
संबंधित साइट पर तत्काल सर्वे कर वास्तविक वृक्ष कटान की रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए
अवैध कॉलोनी विकसित करने वालों पर नियमानुसार कार्रवाई हो
हाई टेंशन लाइन के सुरक्षा मानकों के दृष्टिगत UPPCL की टीम से साइट निरीक्षण कराया जाए
निष्कर्ष
यह मामला केवल विभागीय अनुमति की शर्तों का उल्लंघन नहीं है, बल्कि विद्युत सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण तथा भूमि उपयोग परिवर्तन के नियमों की खुली अवहेलना को भी दर्शाता है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि उद्यान विभाग, HRDA तथा जिला प्रशासन इस प्रकरण में आगे क्या कदम उठाते हैं।
