कुलदीप राय
उत्तराखंड से उत्तर प्रदेश तक किसानों को मिलेगी सिंचाई सुविधा,अधिशासी अभियंता विकास त्यागी की देखरेख में शुरू हुआ जीर्णोद्धार व सौंदर्यकरण कार्य
हरिद्वार। उत्तराखंड से निकलकर उत्तर प्रदेश की ओर बहने वाली ऐतिहासिक गंगा नहर, जो दशकों तक किसानों के लिए जीवनरेखा रही, अब एक बार फिर अपने मूल स्वरूप में लौटने जा रही है। हरिद्वार के बहादराबाद से लेकर धनौरी तक फैली यह नहर लगभग 40 वर्षों से बंद पड़ी थी, लेकिन अब सिंचाई विभाग (उत्तर प्रदेश सरकार) द्वारा इसका जीर्णोद्धार, सफाई एवं सौंदर्यकरण कार्य शुरू कर दिया गया है। इस पूरे कार्य की निगरानी अधिशासी अभियंता श्री विकास त्यागी द्वारा की जा रही है।

गंगा नहर का ऐतिहासिक महत्व
गंगा नहर का निर्माण ब्रिटिश काल में वर्ष 1854 में किया गया था। इसका उद्देश्य गंगा नदी के जल को मैदानी क्षेत्रों तक पहुंचाकर किसानों को सिंचाई सुविधा देना था। पहाड़ों से निकलने वाली यह नहर हरिद्वार से होते हुए उत्तर प्रदेश के कई जिलों को सिंचित करती रही है। यह नहर वर्षों तक खेती, जल प्रबंधन और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनी रही।
उत्तराखंड राज्य बनने के बाद भी यूपी सरकार के अधीन
वर्ष 2000 में उत्तराखंड राज्य की स्थापना के बाद भी गंगा नहर का प्रशासनिक नियंत्रण उत्तर प्रदेश सरकार के सिंचाई विभाग के पास ही रहा। इसका कारण यह है कि नहर की अधिकांश लंबाई और उपयोग उत्तर प्रदेश के कृषि क्षेत्रों में होता है। आज भी गंगा नहर और उससे जुड़ी शाखाओं का रखरखाव, संचालन और नियंत्रण उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग द्वारा किया जाता है।
अब होगा नहर का कायाकल्प
सिंचाई विभाग द्वारा शुरू किए गए इस विशेष अभियान के तहत: नहर की गहराई बढ़ाई जाएगी
सिल्ट और कचरे की सफाई की जाएगी, टूटे तटबंधों की मरम्मत होगी व नहर का सौंदर्यकरण किया जाएगा इससे न केवल सिंचाई व्यवस्था सुधरेगी बल्कि क्षेत्र का पर्यावरण भी संरक्षित होगा।
केमिकल पानी डालने पर सख्त कार्रवाई
विभाग ने स्पष्ट किया है कि नहर में किसी भी फैक्ट्री या औद्योगिक इकाई द्वारा केमिकल या प्रदूषित पानी डालने पर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए नियमित निरीक्षण और निगरानी की व्यवस्था की जा रही है।
अधिशासी अभियंता विकास त्यागी ने कहा:
“गंगा नहर ऐतिहासिक और किसानों
के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उत्तराखंड से उत्तर प्रदेश तक यह नहर सिंचाई का प्रमुख स्रोत रही है। लगभग 40 वर्षों से बंद पड़ी इस नहर को पुनर्जीवित करने का कार्य प्राथमिकता पर किया जा रहा है। नहर में केमिकल पानी डालने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। हमारा उद्देश्य है कि किसान फिर से इस नहर से लाभान्वित हों।”
