एडवोकेट शुभम भारद्वाज
हरिद्वार। इंडस्ट्रियल एरिया स्थित फॉरेस्ट हिल होटल एक बार फिर विवादों में है। होटल के निर्माण व संचालन से जुड़े कई गंभीर पर्यावरणीय उल्लंघन सामने आए हैं। होटल के ठीक सामने वन क्षेत्र में हरी-भरी पेड़ों की अवैध कटाई कर पार्किंग तैयार करने का आरोप तो है ही, साथ ही अब यह भी सामने आया है कि होटल में STP (Sewage Treatment Plant) व्यवस्था अनिवार्य होने के बावजूद या तो मौजूद नहीं है अथवा नियमों के अनुरूप संचालित नहीं हो रही है।यह पूरा इलाका राजाजी टाइगर रिज़र्व की सीमा से मात्र 20 मीटर की दूरी पर आता है, जहां किसी भी तरह का व्यावसायिक निर्माण या पर्यावरण प्रदूषण बेहद संवेदनशील माना जाता है।
होटल के सामने अवैध पार्किंग निर्माण
स्थानीय लोगों के अनुसार होटल के सामने स्थित वन पट्टी में पिछले दिनों कई पेड़ काटे गए। कटाई के बाद जमीन को समतल कर उसे पार्किंग के रूप में बदल दिया गया। यह पूरा क्षेत्र वन्यजीवों के मूवमेंट रूट के बेहद करीब है, जहां इस तरह की गतिविधियाँ NGT नियमावली के अनुसार सख्त वर्जित हैं।
🏨 इको-सेंसिटिव ज़ोन में होटल निर्माण पर भी सवाल
पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि फॉरेस्ट हिल होटल इको-सेंसिटिव ज़ोन (ESZ) की कड़ी शर्तों के बीच आता है। ऐसे क्षेत्र में होटल अथवा किसी भी वाणिज्यिक भवन के निर्माण के लिए अनिवार्य होता है—
पर्यावरणीय अनुमति (Environmental Clearance)
वन विभाग और जिला प्रशासन की NOC
भू-उपयोग परिवर्तन (Land Use Change) की अनुमतियाँ
यदि इनमें से कोई अनुमति नहीं ली गई है, तो यह सीधा-सीधा NGT नियमों का उल्लंघन है।
💧 STP (Sewage Treatment Plant) नियमों का भी उल्लंघन?
NGT और पर्यावरण मंत्रालय के स्पष्ट दिशा-निर्देश कहते हैं कि:
50 बिस्तरों से अधिक क्षमता वाले प्रत्येक होटल में STP होना अनिवार्य है।
होटल से निकलने वाला सारा सीवेज पानी बिना उपचार के नालों या प्राकृतिक जलधारा में नहीं छोड़ा जा सकता।
STP की क्षमता और उसका संचालन नियमित रूप से प्रमाणित होना चाहिए।
इको-सेंसिटिव ज़ोन और वन क्षेत्र के पास स्थित किसी भी होटल की सीवेज व्यवस्था की विशेष निगरानी अनिवार्य है।
स्थानीय स्रोतों के अनुसार फॉरेस्ट हिल होटल में STP या तो मौजूद नहीं है या सही ढंग से काम नहीं कर रही—जो जल प्रदूषण और पर्यावरणीय खतरे को कई गुना बढ़ा सकता है।
