हरिद्वार जिले में हुए चर्चित राजवीर हत्याकांड का पुलिस ने सफल खुलासा करते हुए पूरे मामले की परतें खोल दी हैं। इस ब्लाइंड मर्डर केस में चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि मृतक की शादीशुदा बेटी के प्रेम संबंध ही उसकी हत्या की मुख्य वजह बने।

प्रियांशु पुत्र राजवीर सिंह निवासी ग्राम रानानगला, थाना स्योहारा, जिला बिजनौर ने 27 अप्रैल 2026 को अपने पिता राजवीर सिंह की हत्या की शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के आधार पर कोतवाली बहादराबाद में अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया।
घटना की सूचना डायल 112 के माध्यम से पुलिस को सुबह मिली, जिसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची और शव को जिला अस्पताल हरिद्वार की मोर्चरी में भेजा गया। बाद में परिजनों ने शव की पहचान राजवीर सिंह के रूप में की।

एसएसपी नवनीत सिंह के निर्देश पर पुलिस टीम का गठन किया गया। घटनास्थल से जुटाए गए साक्ष्यों, फील्ड यूनिट की जांच और डिजिटल एविडेंस के आधार पर पुलिस ने मृतक के साथ आखिरी बार देखे गए लोगों की तलाश शुरू की। जांच के दौरान एक संदिग्ध मोबाइल नंबर के आधार पर पुलिस ने कलियर रोड स्थित लकी हॉस्पिटल के बाहर एक संदिग्ध को हिरासत में लिया। पूछताछ में उसने पूरी साजिश का खुलासा कर दिया।

मुख्य आरोपी पंकज कुमार ने बताया कि उसका मृतक की बेटी के साथ प्रेम संबंध था। वह उससे शादी करना चाहता था, जबकि लड़की पहले से शादीशुदा थी। आरोपी लड़की का तलाक करवाकर उससे शादी करना चाहता था, लेकिन मृतक राजवीर इस रिश्ते के खिलाफ था। इसी वजह से पंकज ने अपने साथी छोटेलाल के साथ मिलकर राजवीर की हत्या की साजिश रची।

26 अप्रैल 2026 की शाम आरोपी पंकज और उसका साथी छोटेलाल, राजवीर को बहाने से बौंगला अंडरपास के पास पॉपुलर के खेत में ले गए। वहां शराब पिलाने के बहाने उसे बैठाया गया और फिर हथौड़े से सिर पर वार कर उसकी हत्या कर दी गई।

पुलिस ने पंकज को मौके से गिरफ्तार किया और उसकी निशानदेही पर छोटेलाल को भी हिरासत में ले लिया। आरोपियों के पास से हत्या में इस्तेमाल मोटरसाइकिल, मोबाइल फोन और मृतक का मोबाइल (जिससे शराब की ऑनलाइन पेमेंट की गई थी) बरामद किया गया।

पंकज कुमार (26 वर्ष), निवासी रोशनाबाद, हरिद्वार

छोटेलाल (36 वर्ष), मूल निवासी सीतापुर, वर्तमान में रोशनाबाद में किरायेदार

दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया जा रहा है। इस पूरे मामले के सफल खुलासे में बहादराबाद पुलिस, सिडकुल थाना और सीआईयू हरिद्वार की संयुक्त टीम की अहम भूमिका रही।

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