Rajkumar
देहरादून जनपद के रायवाला क्षेत्र में एक कथित जमीन कब्जा प्रकरण ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है। जहां एक ओर बड़े नेताओं के विवाद अक्सर सुर्खियों में रहते हैं, वहीं अब भाजपा महिला मोर्चा की जिला उपाध्यक्ष लक्ष्मी गुरुंग पर लगे गंभीर आरोपों ने संगठन की छवि पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
यह पूरा मामला पीड़ित चंदन सैनी द्वारा की गई प्रेस वार्ता के बाद सामने आया, जिसमें उन्होंने खुद के साथ हुए कथित अन्याय का विस्तार से जिक्र किया।

“रजिस्ट्री हमारी, कब्जा किसी और का” — पीड़ित का दावा
प्रेस वार्ता में चंदन सैनी ने बताया कि वर्ष 2020 में उन्होंने रायवाला क्षेत्र में एक जमीन विधिवत खरीदी थी, जिसकी पक्की रजिस्ट्री और बेनामा उनके नाम पर दर्ज है। उनके अनुसार, सभी वैध दस्तावेज होने के बावजूद उन्हें अपनी ही जमीन पाने के लिए न्याय की गुहार लगानी पड़ रही है, पीड़ित का आरोप है कि लक्ष्मी गुरुंग ने एक पुराने 50 रुपये के स्टाम्प पेपर पर कथित रूप से फर्जी किरायानामा तैयार कर जमीन पर कब्जा जमा लिया। उन्होंने इसे “कानून और व्यवस्था को खुली चुनौती” बताया।
सत्ता का दबाव या कानून से खिलवाड़?
चंदन सैनी के अनुसार, जब उन्होंने इस मामले की शिकायत पुलिस से की, तो संबंधित महिला को थाने बुलाया गया, लेकिन वह उपस्थित नहीं हुईं। आरोप है कि जब पीड़ित अपनी जमीन पर पहुंचे, तो वहां पहले से मौजूद 20-25 लोगों ने उन्हें घेर लिया। पीड़ित के मुताबिक, उनके साथ गाली-गलौज की गई और उन्हें जमीन से दूर रहने की धमकी दी गई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पूरे घटनाक्रम में राजनीतिक प्रभाव और दबदबे का इस्तेमाल किया गया।
कब्जाई गई जमीन पर खोला गया ‘कार्यालय’?
मामले में एक नया मोड़ तब आया जब पीड़ित ने बताया कि कब्जाई गई प्रॉपर्टी में भाजपा का एक कार्यालय संचालित किया जा रहा है। आरोप है कि सतपाल सैनी द्वारा सोशल मीडिया पर एक पोस्ट डाली गई, जिसमें उक्त कार्यालय का उद्घाटन भाजपा महिला मोर्चा की जिला अध्यक्ष ममता नयाल द्वारा किए जाने की बात कही गई।
हालांकि, ममता नयाल ने इस दावे से साफ इनकार कर दिया, जिससे पूरे प्रकरण पर और अधिक संदेह गहरा गया है।

“पहले भी विवादों में रही हैं” — आरोपों की लंबी फेहरिस्त
प्रेस वार्ता में चंदन सैनी ने आरोप लगाया कि लक्ष्मी गुरुंग पूर्व में भी कई विवादों में घिरी रही हैं। उनका कहना है कि दबाव बनाने के लिए गंभीर आरोपों का सहारा लिया जाता रहा है।
पीड़ित ने यह भी दावा किया कि हरिद्वार स्थित एक आश्रम की जमीन कब्जाने के प्रयास में भी उनका नाम सामने आ चुका है, जहां कर्मचारियों ने विरोध करते हुए उन्हें आश्रम से बाहर निकाल दिया गया था।
इसके अलावा, आरोप है कि वर्ष 2010 में भी काली कमली वाले बाबा के आश्रम पर कब्जे की कोशिश भी की गई थी, जिसमें कथित रूप से लक्ष्मी गुरुंग, सतपाल सैनी और हरपाल सैनी शामिल थे, और आश्रम कर्मचारियों द्वारा उन्हें वहां से बाहर निकाल दिया गया था।
स्थानीय सहयोगियों की भूमिका पर सवाल
पीड़ित ने हरपाल सैनी और सतपाल सैनी पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि इनकी सहमति और सहयोग से यह पूरा षड्यंत्र रचा गया। उन्होंने इसे “संगठित तरीके से जमीन कब्जाने का प्रयास” बताया।
प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल
मामले में अब तक कोई ठोस कार्रवाई न होने से स्थानीय लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या प्रभावशाली लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने में प्रशासन हिचक रहा है, या फिर जांच की प्रक्रिया धीमी है।
न्याय की गुहार
चंदन सैनी ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि उन्हें न्याय नहीं मिला, तो वे उच्च अधिकारियों और न्यायालय का दरवाजा खटखटाने को मजबूर होंगे।
साथ ही, उन्होंने पार्टी नेतृत्व से भी अपील की है कि ऐसे लोगों को संगठन से बाहर किया जाए, जो कथित रूप से पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचा रहे हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल
👉 क्या फर्जी दस्तावेजों के सहारे जमीन कब्जाने का यह खेल सत्ता के संरक्षण में चल रहा है?
👉 या फिर सच्चाई कुछ और है, जिसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है?
निष्कर्ष
फिलहाल, यह मामला सिर्फ एक जमीन विवाद तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह कानून व्यवस्था, प्रशासनिक निष्पक्षता और राजनीतिक नैतिकता की बड़ी परीक्षा बनता जा रहा है। अब सबकी निगाहें प्रशासनिक कार्रवाई और जांच के परिणाम पर टिकी हैं
