हरिद्वार:- विकास प्राधिकरण (HRDA) की नाक के नीचे सील बिल्डिंग मैं पूर्ण हुआ निर्माण कार्य, भ्रष्टाचार की ‘बू’ या विभागीय लापरवाही? कार्यशैली पर उठे सवाल,

हरिद्वार। हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण (HRDA) की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में दिखाई दे रही है। सरवननाथ नगर क्षेत्र में एक निर्माणाधीन भवन को मानचित्र के विपरीत निर्माण और आवासीय स्वीकृति के बावजूद व्यावसायिक उपयोग के लिए विकसित किए जाने की शिकायतों के बाद प्राधिकरण ने 3 अक्टूबर को पुलिस बल, फील्ड स्टाफ एवं तकनीकी अधिकारियों की मौजूदगी में सील किया था। लेकिन अब आरोप हैं कि सील किए जाने के बाद भी भवन में निर्माण कार्य लगातार जारी रहा और आज लगभग पूरा भवन तैयार हो चुका है। जानकारी के अनुसार संबंधित भवन का मानचित्र आवासीय भवन के रूप में स्वीकृत कराया गया था, जबकि मौके पर व्यावसायिक गतिविधियों के अनुरूप निर्माण किए जाने के आरोप लगे। इतना ही नहीं, भवन में एक अतिरिक्त तल का निर्माण भी मानकों के विपरीत किए जाने की शिकायत सामने आई थी। शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए HRDA ने भवन को सील कर दिया था और दावा किया था कि सीलिंग के बाद किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य नहीं होने दिया जाएगा। हालांकि स्थानीय लोगों और शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि सील किए जाने के बाद भी निर्माण कार्य रुकने के बजाय जारी रहा। भवन में फिनिशिंग, आंतरिक साज-सज्जा और अन्य कार्य लगातार चलते रहे, जिसके चलते अब निर्माण लगभग पूर्ण अवस्था में पहुंच चुका है। आरोप यह भी हैं कि जिस उद्देश्य से आश्रम की आड़ में होटलनुमा भवन तैयार किया जा रहा था, वह लक्ष्य लगभग हासिल कर लिया गया है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि भवन वास्तव में सील था तो निर्माण सामग्री, मजदूर और अन्य संसाधन भवन तक कैसे पहुंचे? यदि HRDA समय-समय पर निरीक्षण कर रहा था, जैसा कि विभागीय अधिकारी दावा करते हैं, तो फिर निर्माण कार्य कैसे जारी रहा? यह मामला विभागीय निगरानी और कार्रवाई की प्रभावशीलता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।

शिकायतकर्ताओं का कहना है कि उन्होंने कई बार विभाग को लिखित एवं मौखिक शिकायतें दीं, लेकिन हर बार यही जवाब मिला कि भवन प्राधिकरण की निगरानी में है और कोई निर्माण कार्य नहीं होने दिया जाएगा। इसके बावजूद यदि भवन लगभग पूर्ण हो चुका है, तो यह या तो विभागीय लापरवाही का मामला है या फिर मिलीभगत की आशंकाओं को बल देता है। अब स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने तथा जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि सील किए गए भवनों में भी खुलेआम निर्माण कार्य होते रहेंगे तो विकास प्राधिकरण की कार्रवाई केवल औपचारिकता बनकर रह जाएगी।

जनता के बीच अब एक ही सवाल चर्चा का विषय बना हुआ है— आखिर सील भवन में निर्माण कार्य किसके संरक्षण में पूरा हुआ? और यदि नियमों का खुला उल्लंघन हुआ है तो जिम्मेदार कौन है?

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