कुलदीप राय
हरिद्वार: ज्वालापुर क्षेत्र के ट्रांसपोर्ट नगर में गैस सिलेंडरों की सप्लाई को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि यहां बिना अधिकृत गोदाम के एक सुनसान स्थान पर सिलेंडरों से भरी गाड़ी खड़ी कर गैस सिलेंडरों का वितरण किया जा रहा है। इस पूरे मामले ने खाद्य पूर्ति विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि गैस एजेंसी की गाड़ी ट्रांसपोर्ट नगर के एकांत स्थान पर आकर खड़ी होती है और वहीं से सिलेंडर सप्लाई किए जाते हैं। यह स्थान न तो अधिकृत गोदाम है और न ही सार्वजनिक वितरण केंद्र।

मामले की शिकायत खाद्य पूर्ति विभाग से की गई। शिकायत मिलने के बाद विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे, लेकिन कार्रवाई करने के बजाय उन्होंने इसे एजेंसी का “सेंटर प्वाइंट” बताते हुए कहा कि यहां से सिलेंडर सप्लाई की जा सकती है। अधिकारी के इस बयान के बाद विभाग की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
स्थानीय सूत्रों का आरोप है कि सुनसान स्थान का फायदा उठाकर कई बार सिलेंडरों से 2 से 3 किलो तक गैस निकालने की भी आशंका रहती है। यदि ऐसा होता है तो उपभोक्ताओं को कम गैस वाला सिलेंडर मिलने की संभावना बढ़ जाती है, जो सीधा उपभोक्ता के साथ धोखाधड़ी है।
लोगों में चर्चा है कि जब शिकायत के बाद भी जिम्मेदार अधिकारी एजेंसी के पक्ष में बोलते नजर आए तो यह स्थिति “मेरे सैंया भए कोतवाल, अब डर काहे का” जैसी हो जाती है।
क्या कहते हैं गैस वितरण के नियम
एलपीजी गैस का वितरण LPG (Regulation of Supply and Distribution) Order-2000 और तेल कंपनियों के सुरक्षा नियमों के तहत किया जाता है। हर गैस एजेंसी के पास PESO से लाइसेंस प्राप्त गोदाम होना जरूरी होता है, जहां सिलेंडरों का सुरक्षित भंडारण किया जाता है।
गैस सिलेंडर केवल एजेंसी के अधिकृत गोदाम एजेंसी कार्यालय या घर-घर डिलीवरी के माध्यम से ही उपभोक्ताओं को दिए जा सकते हैं। सड़क, सुनसान जगह या अस्थायी स्थान को वितरण केंद्र बनाकर सिलेंडर देना सुरक्षा और नियम दोनों के खिलाफ माना जाता है।
बड़ा सवाल
यदि ट्रांसपोर्ट नगर में वास्तव में बिना अधिकृत गोदाम के सिलेंडरों की सप्लाई हो रही है, तो क्या यह नियमों का उल्लंघन नहीं है?
अब देखने वाली बात यह होगी कि खाद्य पूर्ति विभाग इस मामले की निष्पक्ष जांच करता है या फिर यह मामला भी अन्य शिकायतों की तरह ठंडे बस्ते में चला जाएगा।
