एडवोकेट शुभम भारद्वाज
हरिद्वार/प्रयागराज:
अखाड़ा परिषद और संत समाज से जुड़े विवाद ने अब एक नया मोड़ ले लिया है। परिषद अध्यक्ष द्वारा लगाए गए आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने तीखा पलटवार किया है और कई गंभीर मुद्दों पर संकेत देते हुए भविष्य में बड़े खुलासों की चेतावनी दी है।
आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने बताया कि वे वर्ष 2016 में करीब 84 दिनों तक संबंधित अखाड़े में रह चुके हैं। इस दौरान उन्होंने वहां की व्यवस्थाओं, आंतरिक कार्यप्रणाली और परिस्थितियों को बेहद करीब से देखा और समझा। उनका कहना है कि संत समाज से जुड़े किसी भी संस्थान पर यदि किसी प्रकार के आरोप या विवाद सामने आते हैं, तो उनकी निष्पक्ष और पारदर्शी जांच होना बेहद आवश्यक है। इससे न केवल सच्चाई सामने आएगी, बल्कि सनातन धर्म की गरिमा और विश्वास भी कायम रहेगा।
उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा कि यदि उनके खिलाफ निराधार आरोप लगाए जाते हैं, तो वे भी चुप नहीं बैठेंगे। उनके अनुसार, उनके पास अखाड़ों से जुड़े कई अहम साक्ष्य मौजूद हैं, जिनमें कुछ गंभीर अनियमितताओं और विवादित मामलों की जानकारी शामिल है। उन्होंने संकेत दिया कि उचित समय आने पर वे इन साक्ष्यों को सार्वजनिक कर सकते हैं।
महाराज ने हरिद्वार के एक आश्रम से जुड़े मामले का जिक्र करते हुए कहा कि कुछ संतों पर महिलाओं द्वारा लगाए गए आरोपों की सच्चाई भी जल्द सामने लाई जाएगी। उन्होंने कहा कि इन मामलों को दबाने की कोशिश की गई, लेकिन अब तथ्य उजागर किए जाएंगे ताकि वास्तविकता जनता के सामने आ सके।
इसके साथ ही उन्होंने एक संत की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत का भी उल्लेख किया और कहा कि इस मामले में अभी कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आना बाकी हैं। उन्होंने इशारों में कहा कि यह मामला भी साधारण नहीं है और इसमें गहन जांच की आवश्यकता है।
आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने यह भी आरोप लगाया कि संत समाज के भीतर कुछ स्थानों पर पद प्राप्त करने के लिए आर्थिक लेन-देन और दबाव की राजनीति जैसे गंभीर मुद्दे मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि कुछ संतों को जानबूझकर फंसाने के प्रयास भी किए गए हैं, जिनके संबंध में उनके पास प्रमाण हैं। हालांकि, इन सभी आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष या संस्था को बदनाम करना नहीं है, बल्कि संत समाज की गरिमा को बनाए रखना और सनातन धर्म की प्रतिष्ठा की रक्षा करना है। उन्होंने निष्पक्ष जांच की मांग दोहराते हुए कहा कि यदि सच्चाई सामने आती है, तो इससे पूरे समाज को लाभ होगा।
विवाद बढ़ने के आसार
अखाड़ा परिषद और संत समाज से जुड़े इस विवाद के सार्वजनिक होने के बाद अब इसके और अधिक बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं। यदि दोनों पक्ष अपने-अपने दावों के समर्थन में साक्ष्य प्रस्तुत करते हैं, तो मामला और गंभीर हो सकता है तथा उच्च स्तर की जांच की संभावना भी बढ़ सकती है। आने वाले समय में यह विवाद संत समाज और धार्मिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर सकता है।
