राजकुमार
मुख्यमंत्री के निर्देश पर हरिद्वार में अतिक्रमण हटाओ अभियान जारी, लेकिन लिखित शिकायतों के बावजूद ‘गंगा सवेरा’ होटल पर कार्रवाई नहीं होने से उठे सवाल
हरिद्वार में मुख्यमंत्री के निर्देश पर जिला प्रशासन द्वारा अतिक्रमण हटाने का अभियान लगातार चलाया जा रहा है। जिलाधिकारी मयूर दीक्षित के निर्देशन में उप जिलाधिकारी मुख्यालय एवं नगर मजिस्ट्रेट हर गिरी के नेतृत्व में देवपुरा चौक से रानीपुर चौक तक नगर निगम, पुलिस और प्रशासन की संयुक्त टीम ने सड़क किनारे लगे अवैध खोखों और ठेलियों को हटाया। प्रशासन का कहना है कि चारधाम यात्रा और आगामी कांवड़ मेले को सुचारू एवं व्यवस्थित रूप से संचालित करने के उद्देश्य से यह अभियान चलाया जा रहा है।
लेकिन इस कार्रवाई के बीच एक बड़ा सवाल भी खड़ा हो रहा है। शहर में ऐसे कई कथित अतिक्रमण हैं जिनकी लिखित शिकायतें संबंधित विभागों को दी जा चुकी हैं, फिर भी उन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
इसी क्रम में नगर निगम हरिद्वार को दी गई एक शिकायत में आरोप लगाया गया है कि लालतारो पुल के पास गड्ढा पार्किंग क्षेत्र के समीप स्थित “गंगा सवेरा” होटल गंगा नहर की सरकारी भूमि पर अवैध अतिक्रमण कर बनाया गया है।
शिकायत में दावा किया गया है कि होटल का निर्माण फ्लड प्लेन क्षेत्र में किया गया है तथा होटल से निकलने वाले सीवेज और गंदे पानी के निस्तारण की समुचित व्यवस्था नहीं है। आरोप है कि गंदा पानी सीधे गंगा नहर में प्रवाहित किया जा रहा है, जिससे जल प्रदूषण फैल रहा है और गंगा की पवित्रता प्रभावित हो रही है।
शिकायतकर्ता ने नगर निगम से होटल के निर्माण की वैधता की जांच, कथित अतिक्रमण हटाने और पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई की मांग की है।
अब बड़ा प्रश्न यह है कि जब प्रशासन छोटे अतिक्रमणों पर बुलडोजर चला रहा है, तो गंगा तट और सरकारी भूमि पर बने कथित बड़े अतिक्रमणों की जांच और कार्रवाई कब होगी? क्या प्रशासन की नजर इन मामलों पर नहीं पड़ी है, या फिर शिकायतों के बावजूद कार्रवाई किसी कारणवश लंबित है?
फिलहाल नगर निगम और संबंधित विभागों की ओर से शिकायत पर सार्वजनिक रूप से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में स्थानीय लोगों की निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।
“खोखों पर सख्ती, लेकिन गंगा किनारे कथित अतिक्रमण पर चुप्पी—आखिर कार्रवाई का पैमाना अलग क्यों?”
